Tuesday, April 6, 2010
दूबे चले चौबे बनने और बन गए दुबई
Thursday, March 18, 2010
माला की माया या फिर माया की माला
Tuesday, March 2, 2010
होली की गप्पबाजी

कल होली की शाम की कहानी ही कुछ अजीब था. दिन-भर तो मुहल्ले के सभी लोग हाथ में रंग-अबीर ले कर होली है..होली है चिल्ला कर एक दूसरे के पूरे शरीर पर रंग लगा रहे थे मानो कोलंबस फिर से कुछ खोज रहे हों. शाम को राँची को मोरहाबादी मैदान के एक किनारे अपने मित्रों के साथ जमघट लगाकर बैठ गया. फिर सभी विद्वानों द्वारा होली के उदभव पर गंभीर बहस ऐसे छिड़ गया जैसे मंत्रीमंडल में मंहगाई, आतंकवाद, नक्सलवाद, संप्रदायवाद आदि पर बहस छिड़ जाता है. लेकिन विद्वत-समूह ने यह तय किया कि सभा तभी विरमित होगा जब एक ठोस कथा सर्वसम्मति से पास हो जायेगा. सभी ज्ञान के महासमुद्र में गोते लगाने लगे. अलग-अलग भाव-मुद्रा तो देखते ही बनता था मानो ऐसे जैसे कि पीएम ने पेट्रोल के दाम को बढ़ाने के लिए लोकलुभावन उपाय सहित एफ.एम को सोचने को कहा हो. कोई आसमान में पूनम की चाँद को निहीरते सोच रहा था तो कोई मैदान में खेल रहे चूहों को देखकर. खैर, अंत में सभी मेरे तरफ मुखातिब होकर, मुझे ही होली के उदभव की कथा तय करने के लिए ऑथोराइज्ड किया. मैने गंभीरते से कहना शुरु किया- जानते हैं.. होली का उदभव चीन में हुआ था. वहां लिन हो और चिन ली नामक दो भाई रहते थे. दोनों की आपस में कट्टर दुश्मनी थी. सालों भर आपस में खूनी लड़ाई लड़ते रहते थे. गाँव के सभी लोग उनके इस खूनी लड़ाई से परेशान थे. तभी वहां भारत से एक अहिंसक साधु पहुंचे. सभी ने उनसे इन दोनों भाईयों के आपस की खूनी लड़ाई को खत्म करवाने की गुहार लगाई. अहिंसक साधु ने दोनों भाईयों से इस खूनी लड़ाई के कारण को पूछा तो वे बोले कि उन्हें खून का लाल रंग बहुत पसंद है इसलिए वे ब्लडी फाईट करते हैं. यह सुनकर अहिंसक साधु ने सलाह दिया कि वे दोनों भाई आपस में लाल रंग लगा लिया करें इसके लिए ब्लडी फाईट करने की क्या जरुरत है. दोनों भाई सहसा ही बोल उठे कि ले बाप ये आईडिया हमारे दिमाग में क्यों नही उठा. दोनों भाई अहिंसक साधु के चरणों में घुलट गए. सभी ग्रामीण साधु का जय-जयकार करने लगे. सभी ने इस रंग भरे पर्व का नाम दोनों भाई के सर नेम को मिला कर रखा “होली”. बाद में चायनीज आयटम की तरह यह पर्व इंडिया में एक्सपोर्ट हो गया और हमलोगों ने इसे सस्ता और टिकाऊ समझ कर अपना लिया.
Monday, March 1, 2010
अबकी होली, सबकी होली

वैसे तो हर साल होली मनाने में मज़ा आता है, मगर इस बार के होली की अलग थी बात... क्योंकि वित्तमंत्री के मंहगे बजट के बाद आहत दिल को भारतीय हॉकी टीम ने पाकिस्तान को 4-1 से हराकर जो मरहम लगाने का काम किया, उसके कारण आम जनता अपने सारे ग़म भुलाकर.. जमकर फाग खेली. बॉस.. भारतीय हॉकी टीम पाकिस्तानियों पर ऐसे गोल ठोक रही थी..जैसे हमलोग आये अतिथियों-पड़ोसियों को पटक-पटक कर रंग लगाते हैं और चिल्ला-चिल्ला कर गाते हैं – बुरा ना मानो होली है (वैसे बुरा मान ही लोगे तो कौन से वित्तमंत्री मंहगाई कम कर देंगे). मैने बहुत डीपली जाकर सोचा.. कि हमारे वित्तमंत्री ने ऑलरेडी मंहगाई की मार झेल रही जनता को ठीक होली से पहले इतना मंहगा बजट क्यूँ दिया....तब जा कर कहीं समझदानी की कटोरी में ये बात जाकर अटकी कि होली के “दिन दिल मिल जाते हैं..दुश्मन भी गले मिल जाते हैं..” और हम उस औरत की तरह हैं जो रो-गाकर भी अपने कर्तव्य को पूरा कर ही डालती है...वो लोग उस दरोगा की तरह हैं जिसे लाख मानवीय मूल्य समझाएं..मगर वो समझने का भी मूल्य मांगने में थोड़ा भी संकोच नही करता...खैर..जब जनता अपके साथ हो ली तो फिर अबकी होली, सबकी होली..
Saturday, February 20, 2010
बिरेन्द्र सेहवाग बोले तो झक्कास क्रिकेट की गारंटी...बापू
शोले के बीरू का वो डॉयलोग तो याद ही होगा “….एक-एक को चुन-चुन कर मारुंगा” क्रिकेट के शोले का वीरू भी बैटिंग करते वक्त मन-ही-मन यही डॉयलोग दुहराता “….एक-एक बॉल को चुन-चुन कर मारुंगा”. क्रिकेट के हर फॉर्मेट में तबड़तोड़ बल्लेबाजी तो उनकी अदा है. तभी तो टेस्ट मे सबसे तेज 250 रन, 300 रन का विश्व रिकार्ड. वन डे में सबसे तेज शतक एवं अर्ध-शतक का भारतीय रिकार्ड सेहवाग के नाम है. बॉलर हमेशा बॉल को देखते हुए यही सोचता होगा कि मुझे तो यह गेंद ही दिखता है पर क्या यह वीरू को फुटबाल दिखता है. अच्छा, शॉट भी ऐसा की फिल्डर डर के मारे छूने की कोशिश भी नहीं करता है. अब तो वीरू टेस्ट का सुल्तान (No. 1) बल्लेबाज भी बन गए हैं..इसका मतलब कि एक तो सेहवाग उस पर से नं0 1 बल्लेबाज..यानि एक तो करैला ऊपर नीम चढ़ी..अब तो साउथ अफ्रीकी बॉलरों का तो भगवान भी मालिक नहीं है...सेहवाग खुद गलती करे तभी कुछ संभव है.
Thursday, February 18, 2010
Kapil Sibal is ready to change the education pattern
कपिल देव और कपिल सिब्बल में नाम के अलावे एक और समानता है वो है कि पहले ने भारतीय क्रिकेट में नये तरीके से फास्ट बॉलिंग को स्थापित किया जबकि सिब्बल साहब, देश में नये तरीके से पढ़ाई-लिखाई की व्यवस्था को स्थापित करने के भागिरथी प्रयास में लगे हैं. मानव संसाधन विभाग मंत्री के रूप में पढ़ाई-लिखाई के तौर-तरीकों का जिस तरह से “पेरेस्त्रोइका” माने पुनर्जागरण-पुनर्निर्माण करने की दिशा में सधे कदमों से प्रयास कर रहे हैं वो उनके भविष्यद्रष्टा होने की परिकल्पना को जीवंत रखता है. गौर करने वाली बात है कि वो और उनकी टीम अपने ग्रे मैटर का उपयोग कर जो निर्णय और बहस को लोगों के बीच रख रहे हैं वो ध्यानाकर्षक हैः (क) बच्चों के स्कूल बैग का वजन (ख) नर्सरी क्लासेस के लिए उम्र कम से कम 4 वर्ष (ग) 9वीं और 10वीं के लिए गणित एवं विज्ञान का पूरे देश में एक पाठ्यक्रम (घ) पूरे देश में हिन्दी की एकरूपता से पढ़ाई-लिखाई (च) 10वीं की ग्रेडिंग आधारित परीक्षा (छ) रैगिंग पर, कॉलेज और विद्यार्थी, दोनों को कठोर दंड (ज) खुला विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या में इजाफा करना (झ) सरकारी और निजी स्कूलों के लिये नियम-कानून (ट) डिग्री में एडमीशन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर चयन परीक्षा (ठ) पढ़ाई का अधिकार (RTE) Act, 2009 की तैयारी (ण) रेलवे के साथ करारः रेलवे के चयनित ज़मीन पर केंद्रीय एवं नवोदय विद्यालयों का निर्माण (त) विदेशी वि0 वि0 के लिए भारतीय स्पेकट्रम खोलने की तैयारी...अभी यह क्रम जारी है. समय आ गया है कि इस रिफॉर्म में आप-हम शामिल हो जाएं और अपने विचार रखें. आपके कमेंट का भूखा ...
Sunday, February 14, 2010
Puna Terrorist attack: अति सर्वत्र वर्ज्यते
“क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो...वो क्या जो दंत हीन, विष हीन विनीत सरल हो...“---- मैं क्या...हर भारतीय के दिल में, बस एक ही बात उठ रही है कि पूणे में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत क्या करेगा. क्या फिर से पत्रों द्वारा भारत पाकिस्तान से डोजियर – डोजियर खेलेगा या फिर भारत के राजा-मंत्री विदेशी आकाओं के आंचल में अपना सर रख कर शिकायत- शिकायत खेलेंगे. फिर विदेशी आका हमें पुचकारते हुए पाकिस्तान को बड़े प्यार से डांटेंगे और अगले ही दिन उसे कई अरब डॉलर का लॉलीपॉप चाटने के लिए देंगे. धिक्कार है! पाक समर्थित आतंकवादी, एक हफ्ता पहले, पाकिस्तान के एक सभा में तान कर पूणे में हमला की धमकी देते हैं और सफल होते है. क्यूं ना हो “वीर भोग्यं वसुन्धरा” वे वीर है. जो बोलते हैम वो कर दिखाते है और एक हम हैं कि जो हमें बार-बार लात मारता है हम उसे अपने यहां बात करने के लिए आमंत्रित करते है कि आओ और आकर कृपा करो..अब कुछ लिखने को मन नहीं कर रहा है. आप ही अब बातों को आगे बढ़ाइये..कमेंट करें..जय भारत